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​*हर पिता के भाग्य मे बेटी नहीं होती*

*हर पिता के भाग्य मे बेटी नहीं होती* *————————————–* *राजा दशरथ जब अपने चारों बेटों की बारात लेकर राजा जनक के द्वार पर पहुँचे तो राजा जनक ने सम्मानपूर्वक बारात का स्वागत किया।* *तभी दशरथ जी ने आगे बढकर जनक जी के चरण छू लिये।चाॅककर जनक जी ने दशरथ जी को थाम लिया और बोले… Continue reading ​*हर पिता के भाग्य मे बेटी नहीं होती*